Niwai   Gaushala 

  • गौ-शाला स्थापना की पृष्ठभूमि

  • भगवान शिव की पावन व धार्मिक नगरी निवाई में पूज्य बापूजी ने अपने लाडले शिष्यों को प्रेरित कर एन एच 12 बाय पास पर वर्ष 2000 में एक विशाल गौशाला की स्थापना कि, पूज्य बापूजी ने यही से पूरे भारत वर्ष में गौशालाओं का निर्माण कर गोसेवा करने का शंखनाद किया. निवाई में पूज्य बापूजी के शिष्य श्री रामस्वरूप गुर्जर ने कुछ स्थानीय लोगों की सहायता से कत्लखाने जाने वाली गौमाताओं को बचाकर एक गोसेवा का स्वरुप प्रारंभ किया, जिसमें उन्होंने अपनी आय की सम्पूर्ण संपत्ति लगाकर गो-माता की रक्षा की, जब उन्हें महसुस हुआ की अब मेरे अकेले के बस में नहीं है तो उन्होंने पूज्य बापूजी की शरण ली और फिर बरसा पूज्य बापूजी का आशीर्वाद. प्रारंभ में जहाँ गोवंश 1000 तक थी वही 3 माह के भीतर बढ़कर 5000 हो गयी उसी समय परमात्मा ने भी गोभाक्तों की परीक्षा ली और भीषण अकाल पड़ा तब गौमाता की रक्षार्थ लगभग 1500 गौमाताओं को मध्य प्रदेश के श्योपुर कलां के डान्ग क्षेत्र जंगलों में चरने हेतु ले जाया गया जहाँ गौमाताओं को चरने हेतु पर्याप्त चारा व पीने हेतु नदी नालों में प्रचुर मात्रा में पानी उपलब्ध था. सन 2001 में श्योपुर गौशाला का निर्माण किया गया इसी तरह समय-समय पर गोवंश की संख्या बढ़ने पर विभिन्न राज्यों में गौशालाओं का निर्माण किया गया जैसे :-

राजस्थान में कोटा, डूंगरीया, गंगानगर, उदयपुर, सुमेरपुर, जोधपुर.

पंजाब में लुधियाना, चंडीगढ़.

मध्य प्रदेश में श्योपुर, छिन्दवाड़ा, रतलाम, सुसनेर , सागर, भोपाल.

महाराष्ट्र में डोंडाइचा,

गुजरात में अहमदाबाद , गांधीनगर, बोडेली, सूरत.

दिल्ली में रजोकरी.

जम्मू & कश्मीर में जम्मू.

हरियाणा में नारनौल आदि गौशाला का निर्माण हुआ.

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