उद्देश्य

पूज्य बापूजी के कथनानुसार गोमाता को हम नहीं पालते गोमाता हमें पालती है. 

गोसंरक्षण

गोपालन

गोसंवर्धन

स्वावलम्बन

Our Story

निवाई में  पूज्य बापूजी ने  वर्ष 2000 में एक विशाल गौशाला की स्थापना कि,  यही से पूरे भारत वर्ष में गौशालाओं का निर्माण कर गोसेवा करने का शंखनाद किया.

गोवंश की संख्या बढ़ने पर विभिन्न राज्यों में गौशालाओं का निर्माण किया गया जैसे :-


राजस्थान में कोटा, डूंगरीया, गंगानगर, उदयपुर, सुमेरपुर, जोधपुर.

पंजाब में लुधियाना, चंडीगढ़.

मध्य प्रदेश में श्योपुर, छिन्दवाड़ा, रतलाम, सुसनेर , सागर, भोपाल.

महाराष्ट्र में डोंडाइचा,

गुजरात में अहमदाबाद , गांधीनगर, बोडेली, सूरत.

दिल्ली में रजोकरी.

जम्मू & कश्मीर में जम्मू.

हरियाणा में नारनौल आदि गौशाला का निर्माण हुआ.

Our Mission

पूज्य बापूजी के कथनानुसार गोमाता को हम नहीं पालते गोमाता हमें पालती है. इसी बात को चरितार्थ करते हुए गौशालाओं को स्वावलंबी बनाने हेतु  , गोसंरक्षण, गोपलन, गोसंवर्धन, पंचगव्य संकलन,परिष्करण एवं विनियोग, सत्संग, सत्संस्कार स्वास्थ्य, स्वावलम्बन  पर्यावरण संरक्षण इसी बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए विभिन्न पहलुओं पर कार्य प्रारंभ किया गया.

Our Vision

गौशालाओं को स्वावलंबी बनाने हेतु पंचगव्य उत्पादों, केचुआ खाद निर्माण व गोबर गैस संयंत्र द्वारा विद्युत निर्माण आदि कार्यक्रम प्रारंभ

GauMata

Gaushala

Years

Gau Sewak

जिन उद्धेश्यों की पूर्ति के लिये गौशाला संस्था स्थापित की गई है, वे इस प्रकार है :-

1. निम्नलिखित साधनों द्वारा गो रक्षा करना :-

पुरे भारत वर्ष में अधिकतर राज्यों में गोवंश की रक्षा एवं पालन-पोषण के लिए गौशालायें स्थापित करना एवं संचालित करना.

व्याख्यानों, पुस्तिकाओं अथवा अन्य वैध उपायों द्वारा लोगों को कृषि, अर्थ एवं स्वास्थ्य सम्बन्धी हितों के लिए गोवंश का महत्त्व समझाना.

गोचर भूमियों को प्राप्त करना अथवा गौओं के लाभार्थ सुरक्षित स्थान बनवाना.

2. राजनैतिक एवं सामजिक दलबंदी से पृथक रहकर प्रत्येक प्रकार से गोवंश की रक्षा करना तथा उसके संवर्धन के लिये रचनात्मक कदम उठाना.

3. लुली, लंगड़ी, असहाय व रुग्ण गोवंश की चिकित्सा एवं सेवा करना तथा गोवंश की नस्ल सुधार करना.

4. शुद्ध दूध, दही, मक्खन, घी तथा अन्य दुग्ध पदार्थों को लोगों तक पहुँचाना एवं दुग्ध वितरण केंद्र संचालित करना.

5. गोसेवा व उसके रक्षण के महत्त्व को जनता में प्रचार करना एवं घर-घर में गो-पालन की प्रेरणा जागृत करना.

6. गोवंश की उन्नति तथा वृद्धि हेतु संवर्धन सम्बन्धी कानून कायदों का बनवाना आवश्यक हो तो संशोधन व परिवर्तन करवाना.

7. गौओं की साधारण अवस्था का सुधार करना तथा उनके स्वास्थ्य एवं जीवन की समुन्नति के लिए समुचित उपाय करना.

8. अच्छी नस्ल की गायों को तैयार करना व समय-समय पर मेले लगवा कर या विद्वानों के भाषणों, संतो महापुरुषों के सत्संग व गो कथाओं के द्वारा गोवंश के महत्त्व पर एवं लेखों द्वारा प्रचार करना तथा आवश्यक साहित्य संकलित व प्रकाशित करना.

9. अच्छी नस्ल के सांडों को तैयार करना और उन्हें गौ पालकों को उनकी गायों के लिये देना तथा बाहर से खरीदकर मुल्य व कम कीमत पर वितरित करना तथा प्राप्त धन राशी को संस्था के उद्धेश्यों की पूर्ति में ही व्यय करना.

10. पशुओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकना और उनका भरण-पोषण करना. गौशाला निर्माण करने के लिए एवं उसके लिए उचित स्थान उपलब्ध करने के लिए एवं चारे की व्यवस्था के लिए राज्य सरकारों को निवेदन करना एवं प्राप्त भूमि को गौशाला के ही काम में लेना.

11. पूरे भारत वर्ष में गौशाला बछड़ा केंद्र खोलना तथा कृषि की उपयोगिता के सिद्धांतों के प्रचार करने के लिए कृषि-क्षेत्र खोलना अथवा इसी प्रकार की संस्थाओं को सहयोग करना.

12. गोरक्षा के लिए पशु-चिकित्सालय, गोसदन, गोबर गैस प्लांट तथा समयानुसार उपयुक्त इसी प्रकार के अन्य उपायों को काम में लाना.

13उन सभी कारणों एवं बातों का आयोजन करना तथा उन सभी उपायों को काम में लाना जो उपरोक्त उद्धेश्यों की पूर्ति में सहायक हो.