गौशाला के लिए आर्थिक आय का जरिया
गौशाला में गोबर और गोमूत्र से अगरबत्तियां (candles of cow dung), साबुन, दीये, हवन के उपले, लकड़ी के आकार वाले उपले सहित कई सामान तैयार किए जा रहे हैं. जिससे गौशाला को भी काफी हद तक आर्थिक मदद मिल रही है. कोरोना के समय में गौशाला के सामने आर्थिक संकट आ गया था और आर्थिक संकट से निकलने के लिए गौशाला संचालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. ऐसे में गौशाला संचालकों ने गौशाला से निकलने वाले गोबर और गोमूत्र को ही आर्थिक आय का जरिया बनाने की तरफ कदम बढ़ाया. उन्होंने गायों के गोबर और गोमूत्र से इन व्यवसाययिक सामानों (Cow dung product) को तैयार किया.

गोबर और गोमूत्र , दूर-दूर से सामान

यहां करीब 700 गायें हैं और रोजाना 2 क्विंटल से ज्यादा गोबर निकलता है. लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए और सुविधा के लिए गाय के गोबर से लकड़ी के आकार के गोकाष्ट बनाए जा रहे हैं. इससे दाह संस्कार आदि में सुविधा हो रही है.

वहीं गौशाला में इन सामानों की खरीदारी के लिए आए लोगों ने बताया कि उनको गोबर और गोमूत्र से बने यह सामान बेहद पसंद आ रहे हैं. सामान खरीदने वालों ने बताया कि इनमें किसी प्रकार की कोई मिलावट नहीं है. इसलिए ना तो पर्यावरण में इनका कोई नुकसान है और ना ही इनको प्रयोग में लाने वाले को किसी प्रकार का नुकसान हो रहा है.

इनकी मांग काफी बढ़ गई है इनको लेने के लिए दूरदराज से लोग गौशाला पहुंचते हैं ऐसे में अब जल्द ही इन सामानों का बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू करने की योजना बनाई जा रही है. बता दें कि गौशाला को मानव सेवा ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है. यहां करीब 700 गायें हैं और रोजाना 2 क्विंटल से ज्यादा गोबर निकलता है. लोगों की आस्था को ध्यान में रखते हुए और सुविधा के लिए गाय के गोबर से लकड़ी के आकार के गोकाष्ट बनाए जा रहे हैं. इससे दाह संस्कार आदि में सुविधा हो रही है.